राज्य का प्रथम धर्म नागरिक की रक्षा है, और जब नागरिक आधी आबादी हो, तो यह धर्म सबसे ऊपर आ जाता है। शक्ति की असली आराधना भी यही है कि हर महिला को सुरक्षा और सम्मान मिले। योगी सरकार ने इसी विचार को अपनी शासन-दृष्टि का केंद्र बनाया है कि सुरक्षा कृपा नहीं, अधिकार है।
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का दूसरा सबसे बड़ा प्रमाण सार्वजनिक स्थानों को असामाजिक तत्वों से मुक्त कराना रहा है। सड़क पर चलते हुए, स्कूल-कॉलेज जाते हुए या बाजारों में महिलाओं और बालिकाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं पर पूर्णतया अंकुश लगाने के लिए सत्ता में आते ही योगी आदित्यनाथ ने ‘एंटी रोमियो स्क्वॉड’ का गठन किया। आंकड़ों के अनुसार इस स्क्वॉड ने अब तक 5 करोड़ 95 लाख से अधिक व्यक्तियों की चेकिंग की है। दो करोड़ 20 लाख से अधिक व्यक्तियों को सख्त चेतावनी देकर छोड़ा गया, जबकि 42,226 मनचलों और अपराधियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की गई है। इस व्यापक कार्रवाई ने मनचलों और अपराधियों में कानून का जो खौफ पैदा किया है, उसी का परिणाम है कि आज प्रदेश की बेटियां निडर होकर बाहर निकल रही हैं। महिलाओं की शिकायतों को बिना किसी देरी के दर्ज करने और उन पर त्वरित कार्रवाई करने के लिए ‘महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन 1090’ (वुमेन पावर लाइन) को और अधिक तकनीकी व ढांचागत रूप से मजबूत किया गया।
योगी सरकार की नीतियों का ही प्रतिफल है कि महिलाओं के अपहरण, घरेलू हिंसा, हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर व जघन्य अपराधों के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आधिकारिक आंकड़े इसे प्रमाणित करते हैं। साल 2016 में उत्तर प्रदेश में दहेज उत्पीड़न और हत्या के मामलों की दर प्रति लाख महिलाओं पर 2.4 थी, जो योगी सरकार में 2024 के आंकड़ों के अनुसार घटकर 1.8 रह गई है। इसी प्रकार, वर्ष 2016 महिलाओं के अपहरण के 13,014 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024 में घटकर 7,919 रह गए। बलात्कार जैसे अत्यंत संवेदनशील और जघन्य अपराधों के आंकड़े देखे जाएं तो 2016 में इसकी दर 4.6 थी, जो अब घटकर 2.8 रह गई है। इसके पीछे अपराधियों के खिलाफ अपनाई गई ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति और अदालतों में मामलों की प्रभावी पैरवी का अहम योगदान है।

